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यह कहानी सन् 1967 की रेलवे स्टेशन बेगुन-कोडार बगालं की है, कहा जाता रेलवे स्टेशन पर एक लड़की का साया नज़र आता है

SZUBAIR KHAN KHAN

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यह कहानी सन् 1967 की रेलवे स्टेशन बेगुन-कोडार बगालं की है, कहा जाता रेलवे स्टेशन पर एक लड़की का साया नज़र आता है
कहते है, वहा किसी लड़की ने नाचते - नाचते रेल की पटरी पर गिर गयी थी इस दोरान उसकी मृत्यु हो गई, ओर उसकी रूह बदला -या- अपनी इच्छा पूरी करने वहा आती है,

लेखक - जुबैर खाँन.....?

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Tags: scary
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बेगुन-कोडार गांव 10 किलोमीटर की दूरी पर  आकर गाङी रोक देता  है, ओर कहता है )

ड्राइवर - सहाब अब यहाँ से किसी रिक्शे या बैलगाड़ी से चले जाइए मैं इससे आगे जा नहीं पाऊंगा

रामदीनकर - आखिर क्यों नही जा पाओगें इससे आगे

ड्राइवर - तुम्हे नहीं पता फिर भी मरने जा रहे हो

रामदीनकर - क्या मतलब

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